Candid Writer

Forgive the randomness of my ideas and the incoherence of my thoughts for I am quite delirious at the moment At the moment there is a storm brewed in my mind which is growing stronger with each minute passing, with its eye in my soul. I have to put something out there to check its … Continue reading Candid Writer

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माँ 

जब रूठ कर सिमट बैठ जाता हूँ कोने में  चुपके से अंधेरे में आकर मना लेती हो माँ ।। किसी की नज़र ना लग जाए तुम्हारे लख्त ए जिगर को रात की कालिख़ से काजल का टीका लगा देती हो माँ ।। तप जाए शरीर थोड़ा, कि मामूली सी मर्ज हो बैठे बैठे हीं रातें … Continue reading माँ 

कागज़ की कश्ती 

बहुत साल पहले इक नाव बनाई थी मैंने   घर के पिछवारे जो दरिया बन बह रहा था सावन उस दरिया में एक नाव बहाई थी मैंने आज खोल कर बैठा था किताब ज़िदगी की इक पन्ना फटा मिला बचपन का कुछ यादें कुछ एहसास छोटी छोटी आयतें खुशियों की माँ की लोरीयाँ कहानीयाँ बाबा … Continue reading कागज़ की कश्ती 

अभिलाषा

अकेलापन जब खाये जाता है भीड़ में तो वापस लौट जाने का जी करता है याद सफर की सताती है तो फिर से नदी बन जाने का जी करता है पर ज़मीन दिखने लगती है मुझे अस्तितव खो जाने का डर सताने लगता है किनारे पर न जाने कितने थपेड़े मारे उस अतीत के तट … Continue reading अभिलाषा

She

She was walking down the road lost in her thoughts. An eternal bliss dripped from her countenance. She was too happy to suppress the faint smile on her face. The streets were dark and deserted on the way to the station. She lived in a small village in the remote corner of the district. She … Continue reading She